Wednesday, June 23, 2021
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Doctors advised to get Corona vaccinations after delivery even during pregnancy


नई दिल्ली: कोरोना (Coronavirus) के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) है. सरकार वैक्सीनेशन ड्राइव को लगातार गति देने का दावा कर रही है. इस सबके बावजूद कोरोना वैक्सीन लगवाने को लेकर आज भी कई भ्रांतियां हैं. कई मामलों में लोग कन्फ्यूज हैं कि वैक्सीन लगवानी है या नहीं? ऐसा ही एक सवाल अक्सर सुनने को मिलता है कि डिलीवरी के बाद महिलाएं वैक्सीन लगवा सकती हैं या नहीं? और लगवा सकती हैं तो कब? विशेषज्ञों ने इन सवालों के जवाब दिए हैं. 

बच्चे को जन्म देने के बाद कब लगवाएं टीका?
स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिला बच्चे को जन्म देने के बाद कभी भी Covid-19 टीका लगवा सकती हैं. विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को भी टीकाकरण की मंजूरी देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उन्हें संक्रमण से बचाया जा सके. सरकार ने स्तनपान कराने वाली महिलाओं के टीकाकरण को हाल में मंजूरी दी है. नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी. के. पॉल ने हाल में स्पष्ट किया था कि बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं का भी टीकाकरण कराया जा सकता है. उन्होंने कहा था, ‘इस तरह की खबरें थीं कि टीका लगवाने वाली माताओं को कुछ दिनों के लिए अपने बच्चों को स्तनपान नहीं कराना चाहिए लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि स्तनपान नहीं रोकना चाहिए और इसे जारी रखना चाहिए.’ 

स्तनपान कराने वाली मां को कोई सतर्कता बरतनी चाहिए?
इस बीच, दिल्ली स्थित गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल और यूनिवर्सिटी मेडिकल साइंस कॉलेज में ‘कम्युनिटी मेडिसिन’ विभाग में प्रोफेसर डॉ. खान आमिर मारूफ ने कहा कि टीकाकरण करा चुकी मां के स्तनपान कराने से नवजात शिशु को कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘प्रसव के बाद टीकाकरण में देरी करने का कोई कारण नहीं है.’ उन्होंने कहा कि स्तनपान कराने वाली मां को टीकाकरण के मद्देनजर कोई विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता नहीं है और उन्हें केवल वे सावधानियां बरतनी हैं, जो आम लोगों को बरतनी चाहिए.

पीरियड्स के दौरान भी टीकाकरण हो सकता है?
फोर्टिस ला फाम, रोजवॉक अस्पताल और अपोलो क्रैडल रॉयल में वरिष्ठ सलाहकार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ लवलीना नादिर ने कहा कि पीरियड्स के दौरान भी टीकाकरण कराया जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘कोरोना वायरस से संक्रमित होने का यह अर्थ नहीं है कि डिलीवरी ऑपरेशन के जरिए ही होगी, लेकिन संक्रमण की वजह से मां के बीमार होने के कारण समय से पूर्व प्रसव और ऑपरेशन के जरिए प्रसव की संभावना बढ़ जाती है. यदि कोई महिला संक्रमण के बाद ठीक हो चुकी है, तो उसे संक्रमण से उबरने के तीन महीने बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए.’

प्रेग्नेंसी से पहले ली पहली खुराक तो? 
नादिर ने कहा कि यदि मरीज ने पहली खुराक ले ली है और इसके बाद उसके गर्भवती होने का पता चलता है, तो उसे इसकी वजह से गर्भपात कराने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा, ‘गर्भवती होने से SARS-COV-2 से संक्रमित होने का खतरा बढ़ता नहीं है, लेकिन संक्रमित गर्भवती महिला का इलाज उस महिला की तुलना में कठिन है, जो गर्भवती नहीं है.’ विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि उन्हें संक्रमण से बचाया जा सके. 

यह भी पढ़ें: कोरोना के बाद बच्‍चों में हो रही ये ‘गंभीर’ बीमारी? डॉक्‍टर भी परेशान

प्रेग्नेंसी के दौरान भी लगे टीका: विशेषज्ञ
स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशानुसार गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करानी वाली मांओं का भी टीकाकरण हो सकता है, लेकिन भारत में गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण अभी विचाराधीन विषय है. फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गाइनकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया की पूर्व अध्यक्ष एवं इनफर्टिलिटी सेंटर ऑफ रेनबो आईवीएफ की अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने भी गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की सलाह दी.

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